उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जद्यपि गृहँ सेवक सेवकिनी। बिपुल सदा सेवा बिधि गुनी।।
मूल पाठ
जद्यपि गृहँ सेवक सेवकिनी। बिपुल सदा सेवा बिधि गुनी।।
निज कर गृह परिचरजा करई। रामचंद्र आयसु अनुसरई।।
स्रोत अभिलेख 7.24 · पुस्तक पृ. 933, 934
भावार्थ
मूल पाठ के बादयद्यपि घरमें बहुत-से (अपार) दास और दासियाँ हैं और वे सभी सेवाकी विधिमें कुशल हैं, तथापि [स्वामीकी सेवाका महत्त्व जाननेवाली] श्रीसीताजी घरकी सब सेवा अपने ही हाथोंसे करती हैं और श्रीरामचन्द्रजीकी आज्ञाका अनुसरण करती हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 933 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जद्यपि गृहँ सेवक सेवकिनी। बिपुल सदा सेवा बिधि गुनी।।
English explanation
Although the household always has numerous male and female attendants skilled in the ways of service—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जद्यपि | यद्यपि | although |
| गृहँ | घर में | in the household |
| सेवक | सेवक | male attendants |
| सेवकिनी | सेविकाएँ | female attendants |
| बिपुल | बहुत-से | numerous |
| सदा | सदा | always |
| सेवा | सेवा की | of service |
| बिधि | विधियों में | in the methods |
| गुनी | निपुण | skilled |
2 निज कर गृह परिचरजा करई। रामचंद्र आयसु अनुसरई।।
English explanation
Nevertheless, Sita personally attends to the household with her own hands and follows Ramachandra's command.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | her own |
| कर | हाथों से | with her hands |
| गृह | घर की | of the household |
| परिचरजा | सेवा; देखभाल | service; care |
| करई | करती हैं | performs |
| रामचंद्र | श्रीराम की | of Rama |
| आयसु | आज्ञा | command |
| अनुसरई | अनुसरण करती हैं | follows |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 933
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 933, 934
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