उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे। दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे।।
मूल पाठ
कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे। दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे।।
श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर। गुनातीत अरु भोग पुरंदर।।
स्रोत अभिलेख 7.24 · पुस्तक पृ. 933, 934
भावार्थ
मूल पाठ के बादप्रभु श्रीरामजीने करोड़ों अश्वमेध यज्ञ किये और ब्राह्मणोंको अनेकों दान दिये। श्रीरामचन्द्रजी वेदमार्गके पालनेवाले, धर्मकी धुरीको धारण करनेवाले, [प्रकृतिजन्य सत्त्व, रज और तम] तीनों गुणोंसे अतीत और भोगों (ऐश्वर्य) में इन्द्रके समान हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 933 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कोटिन्ह बाजिमेध प्रभु कीन्हे। दान अनेक द्विजन्ह कहँ दीन्हे।।
English explanation
AI draft: Lord Rama performed millions of horse sacrifices and gave many gifts to Brahmins.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कोटिन्ह | करोड़ों | tens of millions |
| बाजिमेध | अश्वमेध यज्ञ | horse sacrifices |
| प्रभु | प्रभु राम ने | Lord Rama |
| कीन्हे | किए | performed |
| दान | दान | gifts in charity |
| अनेक | अनेक | many |
| द्विजन्ह | ब्राह्मणों | Brahmins |
| कहँ | को | to |
| दीन्हे | दिए | gave |
2 श्रुति पथ पालक धर्म धुरंधर। गुनातीत अरु भोग पुरंदर।।
English explanation
He upholds the Vedic path, bears the responsibility of righteousness, transcends the three qualities of nature, and resembles Indra in enjoyment and splendor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रुति | वेदों का | of the Vedas |
| पथ | मार्ग | path |
| पालक | पालन करने वाले | upholder |
| धर्म | धर्म का | of righteousness |
| धुरंधर | भार सँभालने वाले | bearer of its responsibility |
| गुनातीत | तीनों गुणों से परे | beyond the three qualities of nature |
| अरु | और | and |
| भोग | भोग-वैभव में | in enjoyment and splendor |
| पुरंदर | इंद्र के समान | like Indra, king of the gods |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.24
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 933
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 933, 934
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।