उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नीचि टहल गृह कै सब करिहउँ। पद पंकज बिलोकि भव तरिहउँ।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दमैं घरकी सब नीची-से-नीची सेवा करूँगा और आपके चरणकमलोंको देख-देखकर भवसागरसे तर जाऊँगा। ऐसा कहकर वे श्रीरामजीके चरणोंमें गिर पड़े [और बोले—] हे प्रभो! मेरी रक्षा कीजिये। हे नाथ! अब यह न कहिये कि तू घर जा॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 928 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
नीचि टहल गृह कै सब करिहउँ। पद पंकज बिलोकि भव तरिहउँ।।
अस कहि चरन परेउ प्रभु पाही। अब जनि नाथ कहहु गृह जाही।।
स्रोत अभिलेख 7.18 · पुस्तक पृ. 927, 928
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नीचि टहल गृह कै सब करिहउँ। पद पंकज बिलोकि भव तरिहउँ।।
English explanation
I will perform every humble household task, and by beholding your lotus feet I will cross the ocean of worldly existence.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नीचि | छोटी; साधारण | humble; menial |
| टहल | सेवा | service |
| गृह | घर | household |
| कै | की | of |
| सब | सब | all |
| करिहउँ | मैं करूँगा | I will perform |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| बिलोकि | देखकर | beholding |
| भव | संसार-सागर | the ocean of worldly existence |
| तरिहउँ | मैं पार करूँगा | I will cross |
2 अस कहि चरन परेउ प्रभु पाही। अब जनि नाथ कहहु गृह जाही।।
English explanation
Saying this, Angad fell at the Lord’s feet: “O Lord, please do not now tell me to go home.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| कहि | कहकर | having said |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| परेउ | गिर पड़े | fell down |
| प्रभु | प्रभु के | of the Lord |
| पाही | पास | near |
| अब | अब | now |
| जनि | मत | do not |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| कहहु | कहिए | tell me |
| गृह | घर | home |
| जाही | जाओ | go |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 928
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 927, 928
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।