उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्हहि बिचारि कहहु नरनाहा। प्रभु तजि भवन काज मम काहा।।
मूल पाठ
तुम्हहि बिचारि कहहु नरनाहा। प्रभु तजि भवन काज मम काहा।।
बालक ग्यान बुद्धि बल हीना। राखहु सरन नाथ जन दीना।।
स्रोत अभिलेख 7.18 · पुस्तक पृ. 927, 928
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे महाराज! आप ही विचारकर कहिये, प्रभु (आप) को छोड़कर घरमें मेरा क्या काम है? हे नाथ! इस ज्ञान, बुद्धि और बलसे हीन बालक तथा दीन सेवकको शरणमें रखिये॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 928 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तुम्हहि बिचारि कहहु नरनाहा। प्रभु तजि भवन काज मम काहा।।
English explanation
O king, consider and tell me yourself: what business have I at home, leaving you, my Lord?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्हहि | आप ही | you yourself |
| बिचारि | विचार करके | after considering |
| कहहु | बताइए | tell me |
| नरनाहा | हे नरेश | O king |
| प्रभु | आपको, हे स्वामी | you, my Lord |
| तजि | छोड़कर | leaving |
| भवन | घर में | at home |
| काज | काम; प्रयोजन | business; purpose |
| मम | मेरा | my |
| काहा | क्या | what |
2 बालक ग्यान बुद्धि बल हीना। राखहु सरन नाथ जन दीना।।
English explanation
I am a child lacking knowledge, understanding, and strength. O Lord, keep this helpless servant in your shelter.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बालक | बालक | a child |
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बुद्धि | बुद्धि | understanding |
| बल | बल | strength |
| हीना | से रहित | lacking |
| राखहु | रखिए | keep |
| सरन | शरण में | in your shelter |
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| जन | सेवक को | this servant |
| दीना | दीन; असहाय | helpless; lowly |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.18
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 928
- सहायक विषय
- वानरोंकी और निषादकी विदाई
- मुद्रित पृष्ठ
- 927, 928
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।