उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नित नव चरन देखि मुनि जाहीं। ब्रह्मलोक सब कथा कहाहीं।।
मूल पाठ
नित नव चरन देखि मुनि जाहीं। ब्रह्मलोक सब कथा कहाहीं।।
सुनि बिरंचि अतिसय सुख मानहिं। पुनि पुनि तात करहु गुन गानहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.42 · पुस्तक पृ. 949, 949
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनि यहाँसे नित्य नये-नये चरित्र देखकर जाते हैं और ब्रह्मलोकमें जाकर सब कथा कहते हैं। ब्रह्माजी सुनकर अत्यन्त सुख मानते हैं [और कहते हैं—] हे तात! बार-बार श्रीरामजीके गुणोंका गान करो॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 949 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नित नव चरन देखि मुनि जाहीं। ब्रह्मलोक सब कथा कहाहीं।।
English explanation
The sage departs after seeing ever-new feet and recounts the whole story in Brahma’s realm. The reading ‘चरन’ is uncertain here; the context suggests witnessing new deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | नित्य | daily |
| नव | नए | new |
| चरन | चरण | feet |
| देखि | देखकर | having seen |
| मुनि | नारद मुनि | sage Narada |
| जाहीं | जाते हैं | departs |
| ब्रह्मलोक | ब्रह्मा के लोक में | in Brahma’s realm |
| सब | सारी | the whole |
| कथा | कथा | account |
| कहाहीं | सुनाते हैं | recounts |
2 सुनि बिरंचि अतिसय सुख मानहिं। पुनि पुनि तात करहु गुन गानहिं।।
English explanation
Hearing this, Brahma feels immense joy and says, ‘Dear one, sing of his virtues again and again.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| अतिसय | अत्यंत | immense |
| सुख | सुख | joy |
| मानहिं | अनुभव करते हैं | experiences |
| पुनि | फिर | again |
| पुनि | फिर | and again |
| तात | प्रिय पुत्र, तात | dear son |
| करहु | करो | do |
| गुन | श्रीराम के गुणों का | of Rama’s virtues |
| गानहिं | गान | singing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.42
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 949
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 949, 949
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।