उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नित नइ प्रीति राम पद पंकज। सबकें जिन्हहि नमत सिव मुनि अज।।
मूल पाठ
नित नइ प्रीति राम पद पंकज। सबकें जिन्हहि नमत सिव मुनि अज।।
मंगन बहु प्रकार पहिराए। द्विजन्ह दान नाना बिधि पाए।।
स्रोत अभिलेख 7.15 · पुस्तक पृ. 925, 925
भावार्थ
मूल पाठ के बादश्रीरामजीके चरणकमलोंमें—जिन्हें श्रीशिवजी, मुनिगण और ब्रह्माजी भी नमस्कार करते हैं— सबकी नित्य नवीन प्रीति है। भिक्षुकोंको बहुत प्रकारके वस्त्राभूषण पहनाये गये और ब्राह्मणोंने नाना प्रकारके दान पाये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 925 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 नित नइ प्रीति राम पद पंकज। सबकें जिन्हहि नमत सिव मुनि अज।।
English explanation
Everyone’s love for Rama’s lotus feet grows fresh each day; Shiva, the sages, and Brahma bow to those feet.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नित | प्रतिदिन | daily |
| नइ | नई | fresh |
| प्रीति | प्रीति | love |
| राम | राम के | of Rama |
| पद | चरण | feet |
| पंकज | कमल | lotuses |
| सबकें | सबकी | everyone’s |
| जिन्हहि | जिन चरणों को | to which feet |
| नमत | प्रणाम करते हैं | bow |
| सिव | शिव | Shiva |
| मुनि | मुनि | sages |
| अज | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
2 मंगन बहु प्रकार पहिराए। द्विजन्ह दान नाना बिधि पाए।।
English explanation
Supplicants were clothed in many kinds of garments, and Brahmins received gifts of various kinds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मंगन | याचकों को | supplicants |
| बहु | बहुत से | many |
| प्रकार | प्रकार के | kinds of |
| पहिराए | वस्त्र पहनाए गए | were clothed |
| द्विजन्ह | ब्राह्मणों ने | Brahmins |
| दान | दान | gifts |
| नाना | अनेक | various |
| बिधि | प्रकार के | kinds of |
| पाए | प्राप्त किए | received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.15
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 925
- सहायक विषय
- राम-राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
- मुद्रित पृष्ठ
- 925, 925
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।