उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
निज कर कमल परसि मम सीसा। हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।।
मूल पाठ
निज कर कमल परसि मम सीसा। हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।।
राम भगति अबिरल उर तोरें। बसिहि सदा प्रसाद अब मोरें।।
स्रोत अभिलेख 7.113 · पुस्तक पृ. 1020, 1021
भावार्थ
मूल पाठ के बादमुनीश्वरने अपने कर-कमलोंसे मेरा सिर स्पर्श करके हर्षित होकर आशीर्वाद दिया कि अब मेरी कृपासे तेरे हृदयमें सदा प्रगाढ़ रामभक्ति बसेगी॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1021 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 निज कर कमल परसि मम सीसा। हरषित आसिष दीन्ह मुनीसा।।
English explanation
The eminent sage touched my head with his lotus-like hand and joyfully bestowed a blessing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| निज | अपने | his own |
| कर | हाथ से | with the hand |
| कमल | कमल-सदृश | lotus-like |
| परसि | छूकर | having touched |
| मम | मेरा | my |
| सीसा | सिर | head |
| हरषित | प्रसन्न होकर | joyfully |
| आसिष | आशीर्वाद | blessing |
| दीन्ह | दिया | gave |
| मुनीसा | श्रेष्ठ मुनि ने | the eminent sage |
2 राम भगति अबिरल उर तोरें। बसिहि सदा प्रसाद अब मोरें।।
English explanation
Through my grace, uninterrupted devotion to Rama will now dwell forever in your heart.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | राम की | to Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| अबिरल | अविरल, निरंतर | uninterrupted |
| उर | हृदय में | in the heart |
| तोरें | तुम्हारे | your |
| बसिहि | बसेगी | will dwell |
| सदा | सदा | forever |
| प्रसाद | कृपा से | through grace |
| अब | अब | now |
| मोरें | मेरी | my |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.113
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1021
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिजीका लोमशजीके पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1020, 1021
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