उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नारदादि सनकादि मुनीसा। दरसन लागि कोसलाधीसा।।
मूल पाठ
नारदादि सनकादि मुनीसा। दरसन लागि कोसलाधीसा।।
दिन प्रति सकल अजोध्या आवहिं। देखि नगरु बिरागु बिसरावहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.27 · पुस्तक पृ. 936, 936
भावार्थ
मूल पाठ के बादनारद आदि और सनक आदि मुनीश्वर सब कोसलराज श्रीरामजीके दर्शनके लिये प्रतिदिन अयोध्या आते हैं और उस [दिव्य] नगरको देखकर वैराग्य भुला देते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 936 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नारदादि सनकादि मुनीसा। दरसन लागि कोसलाधीसा।।
English explanation
Narada, Sanaka, and the other eminent sages come to behold Rama, the lord of Kosala.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नारदादि | नारद ऋषि और अन्य | the sage Narada and others |
| सनकादि | सनक और उनके भाई आदि ऋषि | Sanaka, his brother sages, and others |
| मुनीसा | श्रेष्ठ मुनि | eminent sages |
| दरसन | दर्शन | a sight of the revered lord |
| लागि | के लिए | for the sake of |
| कोसलाधीसा | कोसल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Kosala |
2 दिन प्रति सकल अजोध्या आवहिं। देखि नगरु बिरागु बिसरावहिं।।
English explanation
They all come to Ayodhya every day, and seeing the city, forget their detachment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दिन | दिन | day |
| प्रति | प्रत्येक | each |
| सकल | सभी मुनि | all those sages |
| अजोध्या | अयोध्या नगरी में | to the city of Ayodhya |
| आवहिं | आते हैं | come |
| देखि | देखकर | on seeing |
| नगरु | नगर को | the city |
| बिरागु | वैराग्य को | their detachment |
| बिसरावहिं | भूल जाते हैं | forget |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.27
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 936
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 936, 936
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