उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं।।
मूल पाठ
नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं।।
पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया।।
स्रोत अभिलेख 7.121 · पुस्तक पृ. 1032, 1035
भावार्थ
मूल पाठ के बादजगत्में दरिद्रताके समान दु:ख नहीं है तथा संतोंके मिलनके समान जगत्में सुख नहीं है। और हे पक्षिराज! मन, वचन और शरीरसे परोपकार करना, यह संतोंका सहज स्वभाव है॥ ७॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1033 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 नहिं दरिद्र सम दुख जग माहीं। संत मिलन सम सुख जग नाहीं।।
English explanation
There is no sorrow in the world like poverty, and no happiness like meeting saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नहिं | नहीं | not |
| दरिद्र | दरिद्रता | poverty |
| सम | समान | like |
| दुख | दुःख | sorrow |
| जग | संसार | world |
| माहीं | में | in |
| संत | संतों से | with saints |
| मिलन | मिलन | meeting |
| सम | समान | like |
| सुख | सुख | happiness |
| जग | संसार में | in the world |
| नाहीं | नहीं है | there is none |
2 पर उपकार बचन मन काया। संत सहज सुभाउ खगराया।।
English explanation
O king of birds, helping others through speech, mind, and body is the natural disposition of saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पर | दूसरों का | others |
| उपकार | उपकार | helping |
| बचन | वाणी से | through speech |
| मन | मन से | through mind |
| काया | शरीर से | through body |
| संत | संतों का | of saints |
| सहज | स्वाभाविक | natural |
| सुभाउ | स्वभाव | disposition |
| खगराया | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.121
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1033
- सहायक विषय
- गरुड़जीके सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डिके उत्तर
- मुद्रित पृष्ठ
- 1032, 1035
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