उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
धन्य सती पावन मति तोरी। रघुपति चरन प्रीति नहिं थोरी।।
मूल पाठ
धन्य सती पावन मति तोरी। रघुपति चरन प्रीति नहिं थोरी।।
सुनहु परम पुनीत इतिहासा। जो सुनि सकल लोक भ्रम नासा।।
स्रोत अभिलेख 7.55 · पुस्तक पृ. 960, 961
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे सती! तुम धन्य हो; तुम्हारी बुद्धि अत्यन्त पवित्र है। श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें तुम्हारा कम प्रेम नहीं है (अत्यधिक प्रेम है)। अब वह परम पवित्र इतिहास सुनो, जिसे सुननेसे सारे लोकके भ्रमका नाश हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 961 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 धन्य सती पावन मति तोरी। रघुपति चरन प्रीति नहिं थोरी।।
English explanation
O virtuous lady, blessed is your pure understanding; your love for Rama’s feet is by no means small.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य; प्रशंसनीय | blessed; worthy of praise |
| सती | हे साध्वी पार्वती | O virtuous Parvati |
| पावन | पवित्र | pure |
| मति | बुद्धि | understanding |
| तोरी | तुम्हारी | your |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s line |
| चरन | चरणों में | at the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| नहिं | नहीं | not |
| थोरी | थोड़ा; कम | small; slight |
2 सुनहु परम पुनीत इतिहासा। जो सुनि सकल लोक भ्रम नासा।।
English explanation
Listen to this supremely sacred account, hearing which dispels everyone’s delusion.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनहु | सुनो | listen |
| परम | अत्यंत | supremely |
| पुनीत | पवित्र | sacred |
| इतिहासा | वृत्तांत | account of past events |
| जो | जिसे | which |
| सुनि | सुनकर | upon hearing |
| सकल | सभी | all |
| लोक | लोगों का | people’s |
| भ्रम | भ्रम; मोह | delusion |
| नासा | नाश होता है | is dispelled |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 961
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 960, 961
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