उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कहहु कवन बिधि भा संबादा। दोउ हरिभगत काग उरगादा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दकहिये, काकभुशुण्डि और गरुड़ इन दोनों हरिभक्तोंकी बातचीत किस प्रकार हुई? पार्वतीजीकी सरल, सुन्दर वाणी सुनकर शिवजी सुख पाकर आदरके साथ बोले—॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 960 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
कहहु कवन बिधि भा संबादा। दोउ हरिभगत काग उरगादा।।
गौरि गिरा सुनि सरल सुहाई। बोले सिव सादर सुख पाई।।
स्रोत अभिलेख 7.55 · पुस्तक पृ. 960, 961
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 कहहु कवन बिधि भा संबादा। दोउ हरिभगत काग उरगादा।।
English explanation
Tell me how the dialogue took place between the two devotees of Hari—the crow Kakabhushundi and Garuda, the eater of serpents.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहहु | बताइए | please tell |
| कवन | किस | what |
| बिधि | प्रकार से | in what manner |
| भा | हुआ | took place |
| संबादा | संवाद | dialogue |
| दोउ | दोनों | both |
| हरिभगत | हरि के भक्त | devotees of Hari |
| काग | कौए काकभुशुंडि | the crow Kakabhushundi |
| उरगादा | सर्पभक्षी गरुड़ | Garuda, eater of serpents |
2 गौरि गिरा सुनि सरल सुहाई। बोले सिव सादर सुख पाई।।
English explanation
Hearing Gauri’s sincere and pleasing words, Shiva felt joy and spoke respectfully.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गौरि | गौरी अर्थात पार्वती की | of Gauri, or Parvati |
| गिरा | वाणी | words; speech |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| सरल | सरल; निष्कपट | simple; sincere |
| सुहाई | सुंदर और प्रिय | pleasing and lovely |
| बोले | बोले | spoke |
| सिव | शिव | Shiva |
| सादर | आदरपूर्वक | respectfully |
| सुख | आनंद | joy |
| पाई | पाकर | having felt |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.55
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 960
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 960, 961
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।