उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द'राम-राज्य में दैहिक, दैविक और भौतिक ताप किसीको नहीं व्यापते। सब मनुष्य परस्पर प्रेम करते हैं और वेदोंमें बतायी हुई नीति (मर्यादा) में तत्पर रहकर अपने-अपने धर्मका पालन करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 930 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।
सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।।
स्रोत अभिलेख 7.21 · पुस्तक पृ. 930, 931
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 दैहिक दैविक भौतिक तापा। राम राज नहिं काहुहि ब्यापा।।
English explanation
AI-drafted interpretation: In Rama’s reign, suffering arising from the body, divine or natural forces, and the external world afflicted no one.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दैहिक | शरीर से उत्पन्न | arising from the body |
| दैविक | दैवी या प्राकृतिक शक्तियों से उत्पन्न | arising from divine or natural forces |
| भौतिक | बाहरी भूतों या प्राणियों से उत्पन्न | arising from external elements or beings |
| तापा | दुःख; संताप | afflictions; sufferings |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| राज | राज्य में | in the reign |
| नहिं | नहीं | not |
| काहुहि | किसी को भी | anyone at all |
| ब्यापा | व्याप्त हुआ; सताया | afflicted; affected |
2 सब नर करहिं परस्पर प्रीती। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीती।।
English explanation
All people loved one another and followed their own duties, devoted to the principles of the Vedas.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सब | सभी | all |
| नर | मनुष्य; लोग | people |
| करहिं | करते हैं | practice; do |
| परस्पर | एक-दूसरे से | with one another |
| प्रीती | प्रेम | love |
| चलहिं | चलते हैं; आचरण करते हैं | follow; conduct themselves |
| स्वधर्म | अपने धर्म और कर्तव्य में | in their own duties and dharma |
| निरत | तत्पर; संलग्न | devoted; engaged |
| श्रुति | वेदों की | of the Vedas |
| नीती | नीति; आचरण की मर्यादा | principles; rules of conduct |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 930
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 931
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।