उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दधर्म अपने चारों चरणों (सत्य, शौच, दया और दान) से जगत्में परिपूर्ण हो रहा है; स्वप्रमें भी कहीं पाप नहीं है। पुरुष और स्त्री सभी रामभक्तिके परायण हैं और सभी परमगति (मोक्ष) के अधिकारी हैं॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 931 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।।
राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी।।
स्रोत अभिलेख 7.21 · पुस्तक पृ. 930, 931
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 चारिउ चरन धर्म जग माहीं। पूरि रहा सपनेहुँ अघ नाहीं।।
English explanation
Dharma stood complete in the world on all four of its supports; there was no sin even in dreams.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| चारिउ | चारों | all four |
| चरन | चरण; आधार | feet; supporting pillars |
| धर्म | धर्म; सदाचरण | dharma; righteousness |
| जग | संसार | the world |
| माहीं | में | in |
| पूरि | पूर्ण रूप से | fully; completely |
| रहा | विद्यमान था | remained; stood |
| सपनेहुँ | स्वप्न में भी | even in dreams |
| अघ | पाप | sin |
| नाहीं | नहीं था | was absent |
2 राम भगति रत नर अरु नारी। सकल परम गति के अधिकारी।।
English explanation
Men and women were absorbed in devotion to Rama; all were eligible for the supreme spiritual destination, liberation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम की | to Lord Rama |
| भगति | भक्ति | devotion |
| रत | लीन; लगे हुए | absorbed; devoted |
| नर | पुरुष | men |
| अरु | और | and |
| नारी | स्त्रियाँ | women |
| सकल | सभी | all |
| परम | सर्वोच्च | supreme |
| गति | आध्यात्मिक प्राप्ति; मुक्ति | spiritual destination; liberation |
| के | के | for; of |
| अधिकारी | पात्र; योग्य | eligible; worthy |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.21
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 931
- सहायक विषय
- रामराज्यका वर्णन
- मुद्रित पृष्ठ
- 930, 931
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।