उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
दूरि फराक रुचिर सो घाटा। जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दअलग कुछ दूरीपर वह सुन्दर घाट है, जहाँ घोड़ों और हाथियोंके ठट्ट-के-ठट्ट जल पिया करते हैं। पानी भरनेके लिये बहुत-से [जनाने] घाट हैं, जो बड़े ही मनोहर हैं। वहाँ पुरुष स्नान नहीं करते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 938 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
दूरि फराक रुचिर सो घाटा। जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा।।
पनिघट परम मनोहर नाना। तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना।।
स्रोत अभिलेख 7.29 · पुस्तक पृ. 938, 938
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 दूरि फराक रुचिर सो घाटा। जहँ जल पिअहिं बाजि गज ठाटा।।
English explanation
AI draft: Some distance away stood that beautiful, separate landing, where groups of horses and elephants drank water.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| दूरि | दूर | at a distance |
| फराक | अलग | separate |
| रुचिर | सुंदर | beautiful |
| सो | वह | that |
| घाटा | घाट | riverside landing |
| जहँ | जहाँ | where |
| जल | पानी | water |
| पिअहिं | पीते हैं | drink |
| बाजि | घोड़े | horses |
| गज | हाथी | elephants |
| ठाटा | समूह | groups |
2 पनिघट परम मनोहर नाना। तहाँ न पुरुष करहिं अस्नाना।।
English explanation
There were many exceedingly lovely water-drawing ghats; men did not bathe there.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| पनिघट | पानी भरने के घाट | water-drawing ghats |
| परम | अत्यंत | exceedingly |
| मनोहर | मन को भाने वाले | lovely |
| नाना | अनेक | many |
| तहाँ | वहाँ | there |
| न | नहीं | not |
| पुरुष | पुरुष | men |
| करहिं | करते हैं | perform |
| अस्नाना | स्नान | bathing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.29
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 938
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 938, 938
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।