उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
त्रिजग देव नर जोइ तनु धरउँ। तहँ तहँ राम भजन अनुसरऊँ।।
मूल पाठ
त्रिजग देव नर जोइ तनु धरउँ। तहँ तहँ राम भजन अनुसरऊँ।।
एक सूल मोहि बिसर न काऊ। गुर कर कोमल सील सुभाऊ।।
स्रोत अभिलेख 7.11 · पुस्तक पृ. 1014, 1016
भावार्थ
मूल पाठ के बादतिर्यक् योनि (पशु-पक्षी), देवता या मनुष्यका, जो भी शरीर धारण करता, वहाँ-वहाँ (उस- उस शरीरमें) मैं श्रीरामजीका भजन जारी रखता। [इस प्रकार मैं सुखी हो गया] परन्तु एक शूल मुझे बना रहा। गुरुजीका कोमल, सुशील स्वभाव मुझे कभी नहीं भूलता (अर्थात् मैंने ऐसे कोमल- स्वभाव दयालु गुरुका अपमान किया, यह दु:ख मुझे सदा बना रहा)॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1014 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 त्रिजग देव नर जोइ तनु धरउँ। तहँ तहँ राम भजन अनुसरऊँ।।
English explanation
Whatever body I assume—animal, divine, or human—may I continue worshipping Rama in each.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रिजग | पशु-पक्षी आदि जीव | animals and other nonhuman creatures |
| देव | देवता | a deity |
| नर | मनुष्य | a human |
| जोइ | जो भी | whatever |
| तनु | शरीर | body |
| धरउँ | मैं धारण करूँ | I may assume |
| तहँ | उसमें | in that state |
| तहँ | हर बार | in every such state |
| राम | भगवान राम का | of Lord Rama |
| भजन | भक्ति-भजन | devotional worship |
| अनुसरऊँ | मैं अनुसरण करता रहूँ | may I keep practising |
2 एक सूल मोहि बिसर न काऊ। गुर कर कोमल सील सुभाऊ।।
English explanation
One painful memory never leaves me: my teacher’s gentle character and kindly disposition.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| सूल | हृदय में चुभने वाली पीड़ा | a piercing sorrow |
| मोहि | मुझे | to me |
| बिसर | भूलती | is forgotten |
| न | नहीं | not |
| काऊ | कभी | ever |
| गुर | गुरु | my teacher |
| कर | का | of |
| कोमल | कोमल | gentle |
| सील | शील; सदाचारी व्यवहार | character and gracious conduct |
| सुभाऊ | सौम्य स्वभाव | kindly disposition |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.11
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1014
- सहायक विषय
- गुरुजीका शिवजीसे अपराध-क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डिकी आगेकी कथा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1014, 1016
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।