उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दआप सब कुछ जाननेवाले हैं, तत्त्वके ज्ञाता हैं, अन्धकार (माया) से परे, उत्तम बुद्धिसे युक्त, सुशील, सरल आचरणवाले, ज्ञान, वैराग्य और विज्ञानके धाम और श्रीरघुनाथजीके प्रिय दास हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 996 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा।।
ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा।।
स्रोत अभिलेख 7.94 · पुस्तक पृ. 996, 996
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 तुम्ह सर्बग्य तन्य तम पारा। सुमति सुसील सरल आचारा।।
English explanation
AI draft: You are all-knowing, beyond the darkness of ignorance, wise, virtuous, and straightforward in conduct. The reading ‘तन्य’ is uncertain; if ‘धन्य’ is intended, it also means that you are blessed.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तुम्ह | तुम | you |
| सर्बग्य | सब कुछ जानने वाले | all-knowing |
| तन्य | तत्त्व के ज्ञाता; परम सत्य को जानने वाले। | Knower of ultimate reality. |
| तम | अज्ञानरूपी अंधकार | darkness of ignorance |
| पारा | परे | beyond |
| सुमति | उत्तम बुद्धि वाले | wise; of sound understanding |
| सुसील | उत्तम शील वाले | virtuous; of good character |
| सरल | सरल, निष्कपट | straightforward; sincere |
| आचारा | आचरण वाले | in conduct |
2 ग्यान बिरति बिग्यान निवासा। रघुनायक के तुम्ह प्रिय दासा।।
English explanation
You are the abode of knowledge, dispassion, and realized understanding, and a beloved servant of Rama, lord of the Raghu lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ग्यान | ज्ञान | knowledge |
| बिरति | वैराग्य | dispassion; detachment |
| बिग्यान | अनुभूत ज्ञान | realized understanding |
| निवासा | निवास, आश्रय | abode; repository |
| रघुनायक | रघुकुल के नायक राम | Rama, lord of the Raghu lineage |
| के | के | of |
| तुम्ह | तुम | you |
| प्रिय | प्रिय | beloved |
| दासा | सेवक | servant; devotee |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.94
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 996
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 996, 996
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।