उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तिन्ह महँ द्विज द्विज महँ श्रुतिधारी। तिन्ह महुँ निगम धरम अनुसारी।।
मूल पाठ
तिन्ह महँ द्विज द्विज महँ श्रुतिधारी। तिन्ह महुँ निगम धरम अनुसारी।।
तिन्ह महँ प्रिय बिरक्त पुनि ग्यानी। ग्यानिहु ते अति प्रिय बिग्यानी।।
स्रोत अभिलेख 7.86 · पुस्तक पृ. 988, 988
भावार्थ
मूल पाठ के बादउन मनुष्योंमें भी द्विज, द्विजोंमें भी वेदोंको [कण्ठमें] धारण करनेवाले, उनमें भी वेदोक्त धर्मपर चलनेवाले, उनमें भी विरक्त (वैराग्यवान्) मुझे प्रिय हैं। वैराग्यवानोंमें फिर ज्ञानी और ज्ञानियोंसे भी अत्यन्त प्रिय विज्ञानी हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 988 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1तिन्ह महँ द्विज द्विज महँ श्रुतिधारी। तिन्ह महुँ निगम धरम अनुसारी।।
English explanation
Among humans, Brahmins are dearer; among Brahmins, those versed in the Vedas; and among these, those who follow Vedic dharma.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन मनुष्यों | those humans |
| महँ | में | among |
| द्विज | ब्राह्मण | Brahmins |
| द्विज | ब्राह्मणों | Brahmins |
| महँ | में | among |
| श्रुतिधारी | वेदों के ज्ञाता | those versed in the Vedas |
| तिन्ह | उन वेदज्ञों | those versed in the Vedas |
| महुँ | में | among |
| निगम | वेदों का | of the Vedas |
| धरम | धर्म | dharma |
| अनुसारी | अनुसरण करने वाले | those who follow |
2 तिन्ह महँ प्रिय बिरक्त पुनि ग्यानी। ग्यानिहु ते अति प्रिय बिग्यानी।।
English explanation
Among them, the detached are dear, then the spiritually knowledgeable; dearer still than these are those with realized knowledge.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तिन्ह | उन धर्मानुसारियों | those followers of dharma |
| महँ | में | among |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| बिरक्त | आसक्ति से रहित | those free from attachment |
| पुनि | फिर | then |
| ग्यानी | आध्यात्मिक ज्ञान वाले | those with spiritual knowledge |
| ग्यानिहु | ज्ञानियों भी | even the knowledgeable |
| ते | से | than |
| अति | बहुत अधिक | far more |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| बिग्यानी | ज्ञान का प्रत्यक्ष अनुभव रखने वाले | those with directly realized knowledge |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.86
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 988
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 988, 988
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।