उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तारन तरन हरन सब दूषन। तुलसिदास प्रभु त्रिभुवन भूषन।।
मूल पाठ
तारन तरन हरन सब दूषन। तुलसिदास प्रभु त्रिभुवन भूषन।।
स्रोत अभिलेख 7.35 · पुस्तक पृ. 943, 944
भावार्थ
मूल पाठ के बादआप तरन-तारन (स्वयं तरे हुए और दूसरोंको तारनेवाले) तथा सब दोषोंको हरनेवाले हैं। तीनों लोकोंके विभूषण आप ही तुलसीदासके स्वामी हैं॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 944 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 तारन तरन हरन सब दूषन। तुलसिदास प्रभु त्रिभुवन भूषन।।
English explanation
You are the boat that carries one across, the remover of every fault, the Lord of Tulsidas, and the ornament of the three worlds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तारन | पार उतारने वाली | carrying one across |
| तरन | नाव | boat |
| हरन | हरने वाले | remover |
| सब | सभी | all |
| दूषन | दोष | faults |
| तुलसिदास | कवि तुलसीदास के | of the poet Tulsidas |
| प्रभु | स्वामी | Lord |
| त्रिभुवन | तीनों लोकों के | of the three worlds |
| भूषन | आभूषण, शोभा | ornament, glory |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.35
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 944
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 943, 944
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।