उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
तब खगपति बिरंचि पहिं गयऊ। निज संदेह सुनावत भयऊ।।
मूल पाठ
तब खगपति बिरंचि पहिं गयऊ। निज संदेह सुनावत भयऊ।।
सुनि बिरंचि रामहि सिरु नावा। समुझि प्रताप प्रेम अति छावा।।
स्रोत अभिलेख 7.6 · पुस्तक पृ. 964, 965
भावार्थ
मूल पाठ के बादतब पक्षिराज गरुड़ ब्रह्माजीके पास गये और अपना सन्देह उन्हें कह सुनाया। उसे सुनकर ब्रह्माजीने श्रीरामचन्द्रजीको सिर नवाया और उनके प्रतापको समझकर उनके अत्यन्त प्रेम छा गया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 964 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 तब खगपति बिरंचि पहिं गयऊ। निज संदेह सुनावत भयऊ।।
English explanation
Then Garuda, king of birds, went to Brahma and began relating his doubt.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| खगपति | पक्षियों के स्वामी गरुड़ | Garuda, lord of birds |
| बिरंचि | ब्रह्मा | Brahma, the creator |
| पहिं | के पास | to |
| गयऊ | गए | went |
| निज | अपना | his own |
| संदेह | संदेह | doubt |
| सुनावत | सुनाने | relating |
| भयऊ | लगे | began |
2 सुनि बिरंचि रामहि सिरु नावा। समुझि प्रताप प्रेम अति छावा।।
English explanation
Hearing this, Brahma bowed his head to Rama; recognizing Rama’s might, he was filled with deep love.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सुनि | सुनकर | having heard |
| बिरंचि | ब्रह्मा ने | Brahma |
| रामहि | राम को | to Rama |
| सिरु | सिर | head |
| नावा | झुकाया | bowed |
| समुझि | समझकर | recognizing |
| प्रताप | राम का प्रताप | Rama’s might |
| प्रेम | प्रेम | love |
| अति | अत्यंत | deeply |
| छावा | छा गया | pervaded him |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.6
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 964
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 964, 965
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