उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जोरि पानि कह तब हनुमंता। सुनहु दीनदयाल भगवंता।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दतब हनुमान्जी हाथ जोड़कर बोले—हे दीनदयालु भगवान्! सुनिये। हे नाथ! भरतजी कुछ पूछना चाहते हैं, पर प्रश्र करते मनमें सकुचा रहे हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 944 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जोरि पानि कह तब हनुमंता। सुनहु दीनदयाल भगवंता।।
नाथ भरत कछु पूँछन चहहीं। प्रस्न करत मन सकुचत अहहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.36 · पुस्तक पृ. 944, 944
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जोरि पानि कह तब हनुमंता। सुनहु दीनदयाल भगवंता।।
English explanation
Then Hanuman joined his hands and said, “Lord, compassionate toward the helpless, please listen.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जोरि | जोड़कर | joining |
| पानि | हाथ | hands |
| कह | कहा | said |
| तब | तब | then |
| हनुमंता | हनुमान ने | Hanuman |
| सुनहु | सुनिए | please listen |
| दीनदयाल | हे दीनों पर दया करने वाले | O compassionate one toward the helpless |
| भगवंता | हे भगवान | O Lord |
2 नाथ भरत कछु पूँछन चहहीं। प्रस्न करत मन सकुचत अहहीं।।
English explanation
“Lord, Bharata wishes to ask something, but feels hesitant about posing the question.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नाथ | हे स्वामी | O Lord |
| भरत | भरत, राम के भाई | Bharata, Rama’s brother |
| कछु | कुछ | something |
| पूँछन | पूछना | to ask |
| चहहीं | चाहते हैं | wishes |
| प्रस्न | प्रश्न | a question |
| करत | करते समय | when asking |
| मन | मन में | in his heart |
| सकुचत | संकोच कर रहे | feeling hesitant |
| अहहीं | हैं | is |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.36
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 944
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 944, 944
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