उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जहँ तहँ नर रघुपति गुन गावहिं। बैठि परसपर इहइ सिखावहिं।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दलोग जहाँ-तहाँ श्रीरघुनाथजीके गुण गाते हैं और बैठकर एक-दूसरेको यही सीख देते हैं कि शरणागतका पालन करनेवाले श्रीरामजीको भजो; शोभा, शील, रूप और गुणोंके धाम श्रीरघुनाथजीको भजो॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 939 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जहँ तहँ नर रघुपति गुन गावहिं। बैठि परसपर इहइ सिखावहिं।।
भजहु प्रनत प्रतिपालक रामहि। सोभा सील रूप गुन धामहि।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 939, 939
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जहँ तहँ नर रघुपति गुन गावहिं। बैठि परसपर इहइ सिखावहिं।।
English explanation
AI draft: Everywhere people sing Rama’s virtues and, sitting together, teach one another this.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जहँ | जहाँ | wherever |
| तहँ | वहाँ; जहाँ-तहाँ मिलकर सर्वत्र | there; together, everywhere |
| नर | लोग | people |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| गुन | गुण | virtues |
| गावहिं | गाते हैं | sing |
| बैठि | बैठकर | having sat down |
| परसपर | एक-दूसरे को | one another |
| इहइ | यही | this very thing |
| सिखावहिं | सिखाते हैं | teach |
2 भजहु प्रनत प्रतिपालक रामहि। सोभा सील रूप गुन धामहि।।
English explanation
Worship Rama, protector of those who seek refuge, the abode of splendor, noble character, beauty, and virtues.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| भजहु | भजो; भक्ति करो | worship; be devoted to |
| प्रनत | शरण में आए हुए लोगों के | of those who seek refuge |
| प्रतिपालक | पालन और रक्षा करने वाले | nurturer and protector |
| रामहि | राम को | Rama |
| सोभा | शोभा | splendor |
| सील | सुशीलता; उत्तम चरित्र | noble character |
| रूप | सुंदर स्वरूप | beauty of form |
| गुन | सद्गुण | virtues |
| धामहि | इन सबके धाम को | the abode of all these |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 939
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 939, 939
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।