उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा। समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा।।
मूल पाठ
जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा। समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा।।
इंद्रजीत कर आपु बँधायो। तब नारद मुनि गरुड़ पठायो।।
स्रोत अभिलेख 7.58 · पुस्तक पृ. 963, 963
भावार्थ
मूल पाठ के बादजब श्रीरघुनाथजीने ऐसी रणलीला की जिस लीलाका स्मरण करनेसे मुझे लज्जा होती है— मेघनादके हाथों अपनेको बँधा लिया—तब नारद मुनिने गरुड़को भेजा॥ २॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 963 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 जब रघुनाथ कीन्हि रन क्रीड़ा। समुझत चरित होति मोहि ब्रीड़ा।।
English explanation
When Rama enacted his battle-play—I feel abashed as I reflect on that episode.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| रघुनाथ | रघुवंश के स्वामी राम | Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कीन्हि | की | performed |
| रन | युद्ध की | of battle |
| क्रीड़ा | लीला | play |
| समुझत | विचार करते हुए | while reflecting on |
| चरित | चरित्र, घटना | the episode |
| होति | होती है | arises |
| मोहि | मुझे, शिव को | in me, Shiva |
| ब्रीड़ा | लज्जा, संकोच | embarrassment, bashfulness |
2 इंद्रजीत कर आपु बँधायो। तब नारद मुनि गरुड़ पठायो।।
English explanation
Rama allowed himself to be bound by Indrajit; then the sage Narada sent Garuda.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इंद्रजीत | रावण के पुत्र इंद्रजीत के | by Indrajit, Ravana’s son |
| कर | हाथों | at the hands of |
| आपु | स्वयं को | himself |
| बँधायो | बँधने दिया | allowed to be bound |
| तब | तब | then |
| नारद | नारद | Narada, the divine sage |
| मुनि | मुनि ने | the sage |
| गरुड़ | गरुड़ को, विष्णु के पक्षी-वाहन को | Garuda, Vishnu’s bird-mount |
| पठायो | भेजा | sent |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.58
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 963
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 963, 963
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