उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दजब मैं उसे (सूर्यवंशकी पुरोहितीका काम) नहीं लेता था, तब ब्रह्माजीने मुझे कहा था—हे पुत्र! इससे तुमको आगे चलकर बहुत लाभ होगा। स्वयं ब्रह्म परमात्मा मनुष्यरूप धारण कर रघुकुलके भूषण राजा होंगे॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 955 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही।।
परमातमा ब्रह्म नर रूपा। होइहि रघुकुल भूषन भूपा।।
स्रोत अभिलेख 7.48 · पुस्तक पृ. 954, 955
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जब न लेउँ मैं तब बिधि मोही। कहा लाभ आगें सुत तोही।।
English explanation
When I would not accept this occupation, Brahma told me, ‘Son, you will benefit in the future.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | when |
| न | नहीं | not |
| लेउँ | स्वीकार करूँ | would accept |
| मैं | मैं | I |
| तब | तब | then |
| बिधि | ब्रह्मा ने | Brahma, the creator |
| मोही | मुझसे | to me |
| कहा | कहा | said |
| लाभ | लाभ होगा | there will be benefit |
| आगें | भविष्य में | in the future |
| सुत | हे पुत्र | O son |
| तोही | तुम्हें | to you |
2 परमातमा ब्रह्म नर रूपा। होइहि रघुकुल भूषन भूपा।।
English explanation
‘The Supreme Self, Brahman, will take human form as a king who is the ornament of the Raghu lineage.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| परमातमा | परम आत्मा | the Supreme Self |
| ब्रह्म | परम सत्य ब्रह्म | Brahman, the absolute reality |
| नर | मनुष्य | human |
| रूपा | रूप में | in the form of |
| होइहि | होंगे | will become |
| रघुकुल | रघु का वंश | the Raghu lineage |
| भूषन | शोभा बढ़ाने वाले | the ornament of |
| भूपा | राजा | king |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 955
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 954, 955
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।