उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा। मैं सब कही मोरि मति जथा।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्द[शिवजी कहते हैं—] हे गिरिजे! सुनो, मैंने यह उज्ज्वल कथा, जैसी मेरी बुद्धि थी, वैसी पूरी कह डाली। श्रीरामजीके चरित्र सौ करोड़ [अथवा] अपार हैं। श्रुति और शारदा भी उनका वर्णन नहीं कर सकते॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 958 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा। मैं सब कही मोरि मति जथा।।
राम चरित सत कोटि अपारा। श्रुति सारदा न बरनै पारा।।
स्रोत अभिलेख 7.52 · पुस्तक पृ. 958, 958
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा। मैं सब कही मोरि मति जथा।।
English explanation
AI draft: Girija, listen to this pure account. I have told it all according to my understanding.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गिरिजा | हे पार्वती | O Parvati |
| सुनहु | सुनो | listen |
| बिसद | निर्मल, स्पष्ट | pure, clear |
| यह | यह | this |
| कथा | कथा | account |
| मैं | मैंने | I |
| सब | सब | all |
| कही | कह दी | have told |
| मोरि | मेरी | my |
| मति | बुद्धि, समझ | understanding |
| जथा | के अनुसार | according to |
2 राम चरित सत कोटि अपारा। श्रुति सारदा न बरनै पारा।।
English explanation
Rama’s deeds number a hundred crore and are boundless; even the Vedas and Saraswati cannot fully describe them.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | भगवान राम के | of Lord Rama |
| चरित | चरित, लीलाएँ | deeds and exploits |
| सत | सौ | a hundred |
| कोटि | करोड़ | crore (ten million) |
| अपारा | अपार | boundless |
| श्रुति | वेद | the Vedas |
| सारदा | सरस्वती, वाणी की देवी | Saraswati, goddess of speech |
| न | नहीं | not |
| बरनै | वर्णन कर | describe |
| पारा | सकते | can accomplish |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.52
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 958
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 958, 958
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।