उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा। बोलेउ उमा परम अनुरागा।।
मूल पाठ
गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा। बोलेउ उमा परम अनुरागा।।
धन्य धन्य तव मति उरगारी। प्रस्न तुम्हारि मोहि अति प्यारी।।
स्रोत अभिलेख 7.95 · पुस्तक पृ. 997, 997
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे उमा! गरुडज़ीकी वाणी सुनकर काकभुशुण्डिजी हर्षित हुए और परम प्रेमसे बोले—हे सर्पोंके शत्रु! आपकी बुद्धि धन्य है! धन्य है! आपके प्रश्र मुझे बहुत ही प्यारे लगे॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 997 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 गरुड़ गिरा सुनि हरषेउ कागा। बोलेउ उमा परम अनुरागा।।
English explanation
AI draft: Hearing Garuda’s words, Kakabhushundi rejoiced. O Uma, he spoke with deep affection.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| गरुड़ | गरुड़ की | of Garuda, the divine bird |
| गिरा | वाणी | words |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| हरषेउ | प्रसन्न हुए | rejoiced |
| कागा | काकभुशुण्डि, कौए के रूप में ऋषि | Kakabhushundi, the sage in crow form |
| बोलेउ | बोले | spoke |
| उमा | हे उमा, पार्वती | O Uma, Parvati |
| परम | अत्यंत | with the deepest |
| अनुरागा | प्रेम से | affection |
2 धन्य धन्य तव मति उरगारी। प्रस्न तुम्हारि मोहि अति प्यारी।।
English explanation
O Garuda, enemy of serpents, blessed indeed is your understanding! Your question is very dear to me.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| धन्य | धन्य | blessed |
| धन्य | धन्य | blessed indeed |
| तव | तुम्हारी | your |
| मति | बुद्धि | understanding |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| प्रस्न | प्रश्न | question |
| तुम्हारि | तुम्हारा | your |
| मोहि | मुझे | to me |
| अति | अत्यंत | very |
| प्यारी | प्रिय | dear |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.95
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 997
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 997, 997
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।