उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कृतजुग सब जोगी बिग्यानी। करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।।
मूल पाठ
कृतजुग सब जोगी बिग्यानी। करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।।
त्रेताँ बिबिध जग्य नर करहीं। प्रभुहि समर्पि कर्म भव तरहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.103 · पुस्तक पृ. 1005, 1006
भावार्थ
मूल पाठ के बादसत्ययुगमें सब योगी और विज्ञानी होते हैं। हरिका ध्यान करके सब प्राणी भवसागरसे तर जाते हैं। त्रेतामें मनुष्य अनेक प्रकारके यज्ञ करते हैं और सब कर्मोंको प्रभुके समर्पण करके भवसागरसे पार हो जाते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1005 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 कृतजुग सब जोगी बिग्यानी। करि हरि ध्यान तरहिं भव प्रानी।।
English explanation
AI draft: In the age of truth, all are yogis and spiritually knowledgeable; beings cross worldly existence by meditating on Hari.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कृतजुग | सत्ययुग में | in the age of truth |
| सब | सभी | all |
| जोगी | योग-साधक | practitioners of yoga |
| बिग्यानी | आध्यात्मिक ज्ञान वाले | spiritually knowledgeable |
| करि | करके | having performed |
| हरि | भगवान हरि का | of Lord Hari |
| ध्यान | ध्यान | meditation |
| तरहिं | पार होते हैं | cross beyond |
| भव | संसार-बंधन | worldly existence and bondage |
| प्रानी | प्राणी | living beings |
2 त्रेताँ बिबिध जग्य नर करहीं। प्रभुहि समर्पि कर्म भव तरहीं।।
English explanation
In the age of Treta, people perform various sacrifices and cross worldly existence by dedicating their actions to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्रेताँ | त्रेतायुग में | in the age of Treta |
| बिबिध | विभिन्न | various |
| जग्य | यज्ञ | ritual sacrifices |
| नर | मनुष्य | people |
| करहीं | करते हैं | perform |
| प्रभुहि | प्रभु को | to the Lord |
| समर्पि | समर्पित करके | having dedicated |
| कर्म | अपने कर्म | their actions |
| भव | संसार-बंधन | worldly existence and bondage |
| तरहीं | पार होते हैं | cross beyond |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.103
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1005
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1005, 1006
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।