उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
काल धर्म नहिं ब्यापहिं ताही। रघुपति चरन प्रीति अति जाही।।
मूल पाठ
काल धर्म नहिं ब्यापहिं ताही। रघुपति चरन प्रीति अति जाही।।
नट कृत बिकट कपट खगराया। नट सेवकहि न ब्यापइ माया।।
स्रोत अभिलेख 7.104 · पुस्तक पृ. 1006, 1007
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिसका श्रीरघुनाथजीके चरणोंमें अत्यन्त प्रेम है, उसको कालधर्म (युगधर्म) नहीं व्यापते। हे पक्षिराज! नट (बाजीगर) का किया हुआ कपट-चरित्र (इन्द्रजाल) देखनेवालोंके लिये बड़ा विकट (दुर्गम) होता है, पर नटके सेवक (जंभूरे) को उसकी माया नहीं व्यापती॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1007 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 काल धर्म नहिं ब्यापहिं ताही। रघुपति चरन प्रीति अति जाही।।
English explanation
The tendencies of time do not affect one who has deep love for the feet of Rama, Lord of the Raghu lineage.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| काल | काल के | of time |
| धर्म | स्वभाव और प्रभाव | tendencies and influences |
| नहिं | नहीं | not |
| ब्यापहिं | प्रभावित करते | affect |
| ताही | उसे | that person |
| रघुपति | रघुवंश के स्वामी राम के | of Rama, Lord of the Raghu lineage |
| चरन | चरणों में | for the feet |
| प्रीति | प्रेम | love |
| अति | अत्यंत | very deep |
| जाही | जिसे | who has |
2 नट कृत बिकट कपट खगराया। नट सेवकहि न ब्यापइ माया।।
English explanation
O Garuda, king of birds! The elaborate deceptive illusion created by a performer does not affect that performer’s own servant.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नट | नट द्वारा | by a performer |
| कृत | रचा हुआ | created |
| बिकट | दुर्बोध और जटिल | intricate and baffling |
| कपट | छलपूर्ण खेल | deceptive display |
| खगराया | हे पक्षिराज गरुड़ | O Garuda, king of birds |
| नट | नट के | of the performer |
| सेवकहि | सेवक को | the servant |
| न | नहीं | not |
| ब्यापइ | प्रभावित करती | affect |
| माया | माया या भ्रम | illusion |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.104
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1007
- सहायक विषय
- काकभुशुण्डिका अपनी पूर्वजन्मकथा और कलिमहिमा कहना
- मुद्रित पृष्ठ
- 1006, 1007
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।