उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता। सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता।।
मूल पाठ
कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता। सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता।।
अस बिचारि जे परम सयाने। भजहिं मोहि संसृत दुख जाने।।
स्रोत अभिलेख 7.41 · पुस्तक पृ. 948, 949
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे भाई! मैं उनके लिये कालरूप (भयंकर) हूँ और उनके अच्छे और बुरे कर्मोंका [यथायोग्य] फल देनेवाला हूँ! ऐसा विचारकर जो लोग परम चतुर हैं वे संसार [के प्रवाह] को दु:खरूप जानकर मुझे ही भजते हैं॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 949 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कालरूप तिन्ह कहँ मैं भ्राता। सुभ अरु असुभ कर्म फल दाता।।
English explanation
Brother, to them I am Time in its destructive form, the giver of the fruits of good and bad deeds.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कालरूप | काल का रूप | Time in its destructive form |
| तिन्ह | उन लोगों | those people |
| कहँ | के लिए | for |
| मैं | मैं, राम | I, Rama |
| भ्राता | हे भाई | O brother |
| सुभ | शुभ | good |
| अरु | और | and |
| असुभ | अशुभ | bad |
| कर्म | कर्मों का | of deeds |
| फल | फल | fruits |
| दाता | देने वाला | giver |
2 अस बिचारि जे परम सयाने। भजहिं मोहि संसृत दुख जाने।।
English explanation
Reflecting thus, those who are deeply wise worship me, recognizing worldly existence as suffering.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अस | ऐसा | thus |
| बिचारि | विचार करके | having reflected |
| जे | जो लोग | those who |
| परम | अत्यंत | deeply |
| सयाने | विवेकी हैं | are wise |
| भजहिं | भक्ति करते हैं | worship |
| मोहि | मुझ राम की | me, Rama |
| संसृत | संसार-चक्र को | worldly existence |
| दुख | दुःखमय | as suffering |
| जाने | जानकर | recognizing |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.41
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 949
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 948, 949
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