उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कलि मल मथन नाम ममताहन। तुलसीदास प्रभु पाहि प्रनत जन।।
मूल पाठ
कलि मल मथन नाम ममताहन। तुलसीदास प्रभु पाहि प्रनत जन।।
स्रोत अभिलेख 7.51 · पुस्तक पृ. 957, 957
भावार्थ
मूल पाठ के बादआपका नाम कलियुगके पापोंको मथ डालनेवाला और ममताको मारनेवाला है। हे तुलसीदासके प्रभु! शरणागतकी रक्षा कीजिये॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 957 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कलि मल मथन नाम ममताहन। तुलसीदास प्रभु पाहि प्रनत जन।।
English explanation
Your name destroys the defilement of the Kali age and removes possessive attachment. O Lord of Tulsidas, protect the one who bows in surrender.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कलि | कलियुग के | of the Kali age |
| मल | दोष और कलुष | defilement and impurity |
| मथन | नष्ट करने वाला | destroying |
| नाम | आपका नाम | your name |
| ममताहन | ममता मिटाने वाला | removing possessive attachment |
| तुलसीदास | कवि-भक्त तुलसीदास के | of Tulsidas, the poet-devotee |
| प्रभु | हे स्वामी | O Lord |
| पाहि | रक्षा कीजिए | protect |
| प्रनत | नतमस्तक, शरणागत | bowed in surrender |
| जन | व्यक्ति की | the person |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.51
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 957
- सहायक विषय
- नारदजीका आना और स्तुति करके ब्रह्मलोकको लौट जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 957, 957
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।