उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा।।
मूल पाठ
कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा।।
आवत देखि सकल खगराजा। हरषेउ बायस सहित समाजा।।
स्रोत अभिलेख 7.63 · पुस्तक पृ. 967, 967
भावार्थ
मूल पाठ के बादभुशुण्डिजी कथा आरम्भ करना ही चाहते थे कि उसी समय पक्षिराज गरुडज़ी वहाँ जा पहुँचे। पक्षियोंके राजा गरुडज़ीको आते देखकर काकभुशुण्डिजीसहित सारा पक्षिसमाज हॢषत हुआ॥ ३॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 967 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 कथा अरंभ करै सोइ चाहा। तेही समय गयउ खगनाहा।।
English explanation
Kakabhushundi was just about to begin the story when Garuda, lord of birds, arrived.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कथा | कथा | the story |
| अरंभ | आरंभ | beginning |
| करै | करना | to make; to undertake |
| सोइ | वे ही; काकभुशुंडि | he; Kakabhushundi |
| चाहा | चाहते थे; करने को थे | intended; was about to |
| तेही | उसी | that very |
| समय | समय | time |
| गयउ | वहाँ पहुँचे | arrived there |
| खगनाहा | पक्षियों के स्वामी गरुड़ | Garuda, lord of birds |
2 आवत देखि सकल खगराजा। हरषेउ बायस सहित समाजा।।
English explanation
Seeing Garuda, king of all birds, approaching, Kakabhushundi rejoiced along with the assembled company.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आवत | आते हुए | approaching |
| देखि | देखकर | on seeing |
| सकल | सभी | all |
| खगराजा | पक्षियों के राजा गरुड़ को | Garuda, king of birds |
| हरषेउ | हर्षित हुए | rejoiced |
| बायस | कौआ, अर्थात काकभुशुंडि | the crow, Kakabhushundi |
| सहित | सहित; साथ | together with |
| समाजा | सभा; उपस्थित पक्षियों का समूह | the assembled company of birds |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.63
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 967
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 967, 967
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