उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
ए सब लच्छन बसहिं जासु उर। जानेहु तात संत संतत फुर।।
मूल पाठ
ए सब लच्छन बसहिं जासु उर। जानेहु तात संत संतत फुर।।
सम दम नियम नीति नहिं डोलहिं। परुष बचन कबहूँ नहिं बोलहिं।।
स्रोत अभिलेख 7.38 · पुस्तक पृ. 945, 946
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे तात! ये सब लक्षण जिसके हृदयमें बसते हों, उसको सदा सच्चा संत जानना। जो शम (मनके निग्रह), दम (इन्द्रियोंके निग्रह), नियम और नीतिसे कभी विचलित नहीं होते और मुखसे कभी कठोर वचन नहीं बोलते;॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 946 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 ए सब लच्छन बसहिं जासु उर। जानेहु तात संत संतत फुर।।
English explanation
Dear one, know whoever has all these qualities dwelling in the heart to be always a true saint.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ए | ये | these |
| सब | सभी | all |
| लच्छन | लक्षण; गुण | traits; qualities |
| बसहिं | निवास करते हैं | dwell |
| जासु | जिसके | whose |
| उर | हृदय में | in the heart |
| जानेहु | जानो; समझो | know; recognize |
| तात | हे प्रिय भाई | dear brother |
| संत | संत | saint |
| संतत | सदा | always |
| फुर | सच्चा; वास्तव में | true; genuinely |
2 सम दम नियम नीति नहिं डोलहिं। परुष बचन कबहूँ नहिं बोलहिं।।
English explanation
They do not waver from control of the mind and senses, disciplined observance, and right conduct; they never speak harsh words.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सम | मन का संयम | restraint of the mind |
| दम | इंद्रियों का संयम | restraint of the senses |
| नियम | नियमित अनुशासन | disciplined observances |
| नीति | सदाचार; उचित आचरण | right conduct |
| नहिं | नहीं | not |
| डोलहिं | विचलित होते हैं | waver or depart |
| परुष | कठोर; कड़वे | harsh |
| बचन | वचन | words |
| कबहूँ | कभी भी | ever |
| नहिं | नहीं | not |
| बोलहिं | बोलते हैं | speak |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.38
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 946
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 945, 946
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।