उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे भाई! इस शरीरके प्राप्त होनेका फल विषयभोग नहीं है। [इस जगत्के भोगोंकी तो बात ही क्या] स्वर्गका भोग भी बहुत थोड़ा है और अन्तमें दु:ख देनेवाला है। अत: जो लोग मनुष्यशरीर पाकर विषयोंमें मन लगा देते हैं, वे मूर्ख अमृतको बदलकर विष ले लेते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 951 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई।।
नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।।
स्रोत अभिलेख 7.44 · पुस्तक पृ. 951, 951
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एहि तन कर फल बिषय न भाई। स्वर्गउ स्वल्प अंत दुखदाई।।
English explanation
Brother, the purpose of this human body is not sensual enjoyment. Even heaven is short-lived and brings sorrow in the end.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एहि | इस | this |
| तन | मानव शरीर | human body |
| कर | का | of |
| फल | प्रयोजन; सार्थक फल | purpose; true benefit |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों का भोग | sensual enjoyment |
| न | नहीं | not |
| भाई | हे भाई | O brother |
| स्वर्गउ | स्वर्ग भी | even heaven |
| स्वल्प | अल्पकालिक | short-lived |
| अंत | अंत में | in the end |
| दुखदाई | दुःख देने वाला | bringing sorrow |
2 नर तनु पाइ बिषयँ मन देहीं। पलटि सुधा ते सठ बिष लेहीं।।
English explanation
Those who obtain a human body but set their minds on sensual pleasures foolishly exchange nectar for poison.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| नर | मनुष्य का | human |
| तनु | शरीर | body |
| पाइ | पाकर | having obtained |
| बिषयँ | विषय-भोगों में | on sensual pleasures |
| मन | मन | mind |
| देहीं | लगाते हैं | set; direct |
| पलटि | बदले में | in exchange |
| सुधा | अमृत | nectar of immortality |
| ते | के बदले | in place of |
| सठ | मूर्ख लोग | fools |
| बिष | विष | poison |
| लेहीं | लेते हैं | take |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.44
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 951
- सहायक विषय
- श्रीरामजीका प्रजाको उपदेश (श्रीरामगीता), पुरवासियोंकी कृतज्ञता
- मुद्रित पृष्ठ
- 951, 951
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।