उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दएक बार मुनि वसिष्ठजी वहाँ आये जहाँ सुन्दर सुखके धाम श्रीरामजी थे। श्रीरघुनाथजीने उनका बहुत ही आदर-सत्कार किया और उनके चरण धोकर चरणामृत लिया॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 954 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए।।
अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा।।
स्रोत अभिलेख 7.48 · पुस्तक पृ. 954, 955
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए।।
English explanation
Once, sage Vasistha came to where Rama, the abode of happiness, was graciously present. (This is an AI-generated draft interpretation.)
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| एक | एक | one |
| बार | अवसर पर | occasion |
| बसिष्ट | वसिष्ठ, राम के कुलगुरु | Vasistha, Rama’s family preceptor |
| मुनि | ऋषि | sage |
| आए | आए | came |
| जहाँ | जिस स्थान पर | where |
| राम | राम | Rama |
| सुखधाम | सुख के धाम | abode of happiness |
| सुहाए | सुशोभित थे | was graciously present |
2 अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा।।
English explanation
Rama, lord of the Raghu line, honored him greatly, washed his feet, and received the water from that washing.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | greatly |
| आदर | सम्मान | honor |
| रघुनायक | रघुवंश के नायक राम ने | Rama, lord of the Raghu line |
| कीन्हा | किया | performed |
| पद | मुनि के चरण | the sage’s feet |
| पखारि | धोकर | having washed |
| पादोदक | चरण धोने का जल | water from washing the feet |
| लीन्हा | ग्रहण किया | received |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.48
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 954
- सहायक विषय
- श्रीराम-वसिष्ठ-संवाद, श्रीरामजीका भाइयोंसहित अमराईमें जाना
- मुद्रित पृष्ठ
- 954, 955
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।