उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इहाँ न पच्छपात कछु राखउँ। बेद पुरान संत मत भाषउँ।।
मूल पाठ
इहाँ न पच्छपात कछु राखउँ। बेद पुरान संत मत भाषउँ।।
मोह न नारि नारि कें रूपा। पन्नगारि यह रीति अनूपा।।
स्रोत अभिलेख 7.116 · पुस्तक पृ. 1025, 1025
भावार्थ
मूल पाठ के बादयहाँ मैं कुछ पक्षपात नहीं रखता। वेद, पुराण और संतोंका मत (सिद्धान्त) ही कहता हूँ। हे गरुडज़ी! यह अनुपम (विलक्षण) रीति है कि एक स्त्रीके रूपपर दूसरी स्त्री मोहित नहीं होती॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1025 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 इहाँ न पच्छपात कछु राखउँ। बेद पुरान संत मत भाषउँ।।
English explanation
AI-generated interpretive draft: Here I show no partiality; I state the view of the Vedas, the Puranas, and the saints.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इहाँ | यहाँ, इस विषय में | here, in this matter |
| न | नहीं | not |
| पच्छपात | पक्षपात | partiality |
| कछु | कुछ भी | any at all |
| राखउँ | मैं रखता हूँ | I retain |
| बेद | वेदों का | of the Vedas |
| पुरान | पुराणों का | of the Puranas |
| संत | संतों का | of the saints |
| मत | मत, अभिमत | view, teaching |
| भाषउँ | मैं कहता हूँ | I state |
2 मोह न नारि नारि कें रूपा। पन्नगारि यह रीति अनूपा।।
English explanation
A woman is not captivated by another woman's beauty. O Garuda, enemy of serpents, this is a distinctive way of things.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| मोह | मोह होता है, मोहित होती है | is captivated |
| न | नहीं | not |
| नारि | स्त्री को | a woman |
| नारि | दूसरी स्त्री | another woman |
| कें | के | of |
| रूपा | रूप, सुंदरता पर | by beauty |
| पन्नगारि | हे सर्पों के शत्रु गरुड़ | O Garuda, enemy of serpents |
| यह | यह | this |
| रीति | रीति, स्वभावगत ढंग | way, characteristic pattern |
| अनूपा | अनोखी | distinctive |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.116
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1025
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1025, 1025
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।