उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
इंद्रिन्ह सुरन्ह न ग्यान सोहाई। बिषय भोग पर प्रीति सदाई।।
मूल पाठ
इंद्रिन्ह सुरन्ह न ग्यान सोहाई। बिषय भोग पर प्रीति सदाई।।
बिषय समीर बुद्धि कृत भोरी। तेहि बिधि दीप को बार बहोरी।।
स्रोत अभिलेख 7.118 · पुस्तक पृ. 1028, 1029
भावार्थ
मूल पाठ के बादइन्द्रियों और उनके देवताओंको ज्ञान [स्वाभाविक ही] नहीं सुहाता; क्योंकि उनकी विषय- भोगोंमें सदा ही प्रीति रहती है। और बुद्धिको भी विषयरूपी हवाने बावली बना दिया। तब फिर (दुबारा) उस ज्ञानदीपकको उसी प्रकारसे कौन जलावे?॥ ८॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 1029 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 इंद्रिन्ह सुरन्ह न ग्यान सोहाई। बिषय भोग पर प्रीति सदाई।।
English explanation
Knowledge does not please the senses or their presiding gods; their affection is always directed toward sensory enjoyment.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| इंद्रिन्ह | इंद्रियों को | to the senses |
| सुरन्ह | देवताओं को | to the gods |
| न | नहीं | not |
| ग्यान | आत्मज्ञान | knowledge of the self |
| सोहाई | भाता है | is pleasing |
| बिषय | इंद्रिय-विषयों का | of sense objects |
| भोग | भोग | enjoyment |
| पर | पर | toward |
| प्रीति | प्रेम | affection |
| सदाई | सदा | always |
2 बिषय समीर बुद्धि कृत भोरी। तेहि बिधि दीप को बार बहोरी।।
English explanation
The wind of sense objects has bewildered the intellect; who, then, will light the lamp again by that method?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिषय | इंद्रिय-विषयों की | of sense objects |
| समीर | हवा | wind |
| बुद्धि | बुद्धि को | the intellect |
| कृत | कर दिया | has made |
| भोरी | बावली अथवा भ्रमित | bewildered |
| तेहि | उस | that |
| बिधि | विधि से | by the method |
| दीप | दीपक | the lamp |
| को | कौन | who |
| बार | जलाए | will light |
| बहोरी | फिर से | again |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.118
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 1029
- सहायक विषय
- ज्ञान-भक्ति-निरूपण, ज्ञानदीपक और भक्तिकी महान् महिमा
- मुद्रित पृष्ठ
- 1028, 1029
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।