उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा। तुम्हरें दरस जाहिं अघ खीसा।।
मूल पाठ
आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा। तुम्हरें दरस जाहिं अघ खीसा।।
बड़े भाग पाइब सतसंगा। बिनहिं प्रयास होहिं भव भंगा।।
स्रोत अभिलेख 7.33 · पुस्तक पृ. 941, 942
भावार्थ
मूल पाठ के बादहे मुनीश्वरो! सुनिये, आज मैं धन्य हूँ। आपके दर्शनोंहीसे [सारे] पाप नष्ट हो जाते हैं। बड़े ही भाग्यसे सत्संगकी प्राप्ति होती है, जिससे बिना ही परिश्रम जन्म-मृत्युका चक्र नष्ट हो जाता है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 942 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 आजु धन्य मैं सुनहु मुनीसा। तुम्हरें दरस जाहिं अघ खीसा।।
English explanation
Listen, noble sages: today I am blessed; through the sight of you, sins are diminished and disappear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| आजु | आज | today |
| धन्य | धन्य, सौभाग्यशाली | blessed |
| मैं | मैं | I |
| सुनहु | सुनिए | listen |
| मुनीसा | हे श्रेष्ठ मुनियो | O noble sages |
| तुम्हरें | आपके | of you; your |
| दरस | दर्शन से | through beholding |
| जाहिं | हो जाते हैं | become |
| अघ | पाप | sins |
| खीसा | क्षीण, नष्ट | diminished, effaced |
2 बड़े भाग पाइब सतसंगा। बिनहिं प्रयास होहिं भव भंगा।।
English explanation
The company of saints is attained through great good fortune; through it, worldly bondage is broken without effort.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बड़े | बड़े | great |
| भाग | सौभाग्य से | through good fortune |
| पाइब | प्राप्त होता है | is attained |
| सतसंगा | संतों का संग | the company of saints |
| बिनहिं | बिना ही | without any |
| प्रयास | प्रयत्न | effort |
| होहिं | हो जाता है | occurs |
| भव | संसार-बंधन का | of worldly bondage |
| भंगा | टूटना, नाश | breaking, dissolution |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.33
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 942
- सहायक विषय
- पुत्रोत्पत्ति, अयोध्याजीकी रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
- मुद्रित पृष्ठ
- 941, 942
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।