उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
असि रघुपति लीला उरगारी। दनुज बिमोहनि जन सुखकारी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहे गरुडज़ी! ऐसी ही श्रीरघुनाथजीकी यह लीला है, जो राक्षसोंको विशेष मोहित करनेवाली और भक्तोंको सुख देनेवाली है। हे स्वामी! जो मनुष्य मलिनबुद्धि, विषयोंके वश और कामी हैं, वे ही प्रभुपर इस प्रकार मोहका आरोप करते हैं॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 976 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
असि रघुपति लीला उरगारी। दनुज बिमोहनि जन सुखकारी।।
जे मति मलिन बिषयबस कामी। प्रभु मोह धरहिं इमि स्वामी।।
स्रोत अभिलेख 7.73 · पुस्तक पृ. 976, 976
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 असि रघुपति लीला उरगारी। दनुज बिमोहनि जन सुखकारी।।
English explanation
AI draft: O Garuda, such is Rama’s divine play: it deludes demons and brings joy to devotees.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| असि | ऐसी | such |
| रघुपति | रघुकुल के स्वामी राम की | of Rama, lord of the Raghu lineage |
| लीला | लीला | divine play |
| उरगारी | हे सर्पों के शत्रु गरुड़! | O Garuda, foe of serpents! |
| दनुज | राक्षसों को | demons |
| बिमोहनि | मोह में डालने वाली | deluding |
| जन | भक्तों को | devotees |
| सुखकारी | सुख देने वाली | bringing happiness |
2 जे मति मलिन बिषयबस कामी। प्रभु मोह धरहिं इमि स्वामी।।
English explanation
O lord, those whose understanding is clouded, who are ruled by sense pleasures and desires, thus attribute delusion to the Lord.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जे | जो लोग | those who |
| मति | बुद्धि | understanding |
| मलिन | मलिन है | is clouded |
| बिषयबस | इंद्रिय-विषयों के वश में | ruled by sense pleasures |
| कामी | कामनाओं से भरे | full of desire |
| प्रभु | प्रभु पर | to the Lord |
| मोह | मोह | delusion |
| धरहिं | आरोपित करते हैं | attribute |
| इमि | इस प्रकार | in this way |
| स्वामी | हे स्वामी! | O lord! |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.73
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 976
- सहायक विषय
- शिव-पार्वती-संवाद, गरुड़-मोह, गरुड़जीका काकभुशुण्डिसे रामकथा और राम-महिमा सुनना
- मुद्रित पृष्ठ
- 976, 976
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।