उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दप्रभुको आते जानकर अवधपुरी सम्पूर्ण शोभाओंकी खान हो गयी। तीनों प्रकारकी सुन्दर वायु बहने लगी। सरयूजी अति निर्मल जलवाली हो गयीं (अर्थात् सरयूजीका जल अत्यन्त निर्मल हो गया)॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 910 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी।।
बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा।।
स्रोत अभिलेख 7.3 · पुस्तक पृ. 909, 910
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 अवधपुरी प्रभु आवत जानी। भई सकल सोभा कै खानी।।
English explanation
Knowing that the Lord was coming, Ayodhya became a treasury of every kind of splendor.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवधपुरी | अयोध्या नगरी | the city of Ayodhya |
| प्रभु | प्रभु राम | Lord Rama |
| आवत | आ रहे हैं | was coming |
| जानी | जानकर | knowing |
| भई | बन गई | became |
| सकल | समस्त | all |
| सोभा | शोभा | splendor |
| कै | की | of |
| खानी | खान, भंडार | mine; treasury |
2 बहइ सुहावन त्रिबिध समीरा। भइ सरजू अति निर्मल नीरा।।
English explanation
A pleasant breeze blew, cool, gentle, and fragrant; the waters of the Sarayu became exceedingly clear.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बहइ | बहती है | blows |
| सुहावन | सुहावनी | pleasant |
| त्रिबिध | तीन गुणों वाली—शीतल, मंद, सुगंधित | threefold—cool, gentle, and fragrant |
| समीरा | हवा | breeze |
| भइ | हो गई | became |
| सरजू | सरयू नदी | the Sarayu River |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| निर्मल | निर्मल | clear and pure |
| नीरा | जल वाली | with waters |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.3
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 910
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 909, 910
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।