उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अवगुन सिंधु मंदमति कामी। बेद बिदूषक परधन स्वामी।।
मूल पाठ
अवगुन सिंधु मंदमति कामी। बेद बिदूषक परधन स्वामी।।
बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा। दंभ कपट जियँ धरें सुबेषा।।
स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 947, 948
भावार्थ
मूल पाठ के बादवे अवगुणोंके समुद्र, मन्दबुद्धि, कामी (रागयुक्त), वेदोंके निन्दक और जबर्दस्ती पराये धनके स्वामी (लूटनेवाले) होते हैं। वे दूसरोंसे द्रोह तो करते ही हैं; परन्तु ब्राह्मण-द्रोह विशेषतासे करते हैं। उनके हृदयमें दम्भ और कपट भरा रहता है, परन्तु वे [ऊपरसे] सुन्दर वेष धारण किये रहते हैं॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 948 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
1 अवगुन सिंधु मंदमति कामी। बेद बिदूषक परधन स्वामी।।
English explanation
They are oceans of faults, dull-witted and lustful; they disparage the Vedas and claim ownership of others’ wealth.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अवगुन | दोषों के | of faults |
| सिंधु | समुद्र | oceans |
| मंदमति | मंदबुद्धि; अल्पविवेकी | dull-witted; lacking discernment |
| कामी | कामवासना में लिप्त | lustful |
| बेद | वेदों के | of the Vedas |
| बिदूषक | निंदक | disparagers |
| परधन | दूसरों के धन के | of others’ wealth |
| स्वामी | स्वामी बन बैठने वाले | those who claim ownership |
2 बिप्र द्रोह पर द्रोह बिसेषा। दंभ कपट जियँ धरें सुबेषा।।
English explanation
They bear particular malice toward Brahmins and others. Holding pretension and deceit in their hearts, they put on a respectable outward appearance.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| बिप्र | ब्राह्मणों के प्रति | toward Brahmins |
| द्रोह | द्वेष; अहित का भाव | malice; hostility |
| पर | दूसरों के प्रति | toward others |
| द्रोह | द्वेष; अहित का भाव | malice; hostility |
| बिसेषा | विशेष रूप से; अत्यधिक | particularly; intensely |
| दंभ | दिखावटी श्रेष्ठता; पाखंड | pretension; hypocrisy |
| कपट | छल | deceit |
| जियँ | हृदय में | in the heart |
| धरें | धारण करते हैं | they wear |
| सुबेषा | अच्छा; सम्माननीय दिखने वाला वेश | fine, respectable-looking attire |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 948
- सहायक विषय
- हनुमान्जीके द्वारा भरतजीका प्रश्न और श्रीरामजीका उपदेश
- मुद्रित पृष्ठ
- 947, 948
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।