उत्तरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दयहाँके निवासी मुझे बहुत ही प्रिय हैं। यह पुरी सुखकी राशि और मेरे परमधामको देनेवाली है। प्रभुकी वाणी सुनकर सब वानर हर्षित हुए [और कहने लगे कि] जिस अवधकी स्वयं श्रीरामजीने बड़ाई की, वह [अवश्य ही] धन्य है॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 911 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।।
हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।
स्रोत अभिलेख 7.4 · पुस्तक पृ. 910, 911
शब्द-दर-शब्द अर्थ
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1 अति प्रिय मोहि इहाँ के बासी। मम धामदा पुरी सुख रासी।।
English explanation
The inhabitants here are very dear to me. This city grants my abode and is a treasury of happiness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अति | बहुत | very |
| प्रिय | प्रिय | dear |
| मोहि | मुझे | to me |
| इहाँ | यहाँ | here |
| के | के | of |
| बासी | निवासी | inhabitants |
| मम | मेरा | my |
| धामदा | धाम देने वाली | granting the abode |
| पुरी | नगरी | city |
| सुख | सुख | happiness |
| रासी | राशि, भंडार | treasury; abundance |
2 हरषे सब कपि सुनि प्रभु बानी। धन्य अवध जो राम बखानी।।
English explanation
All the monkeys rejoiced on hearing the Lord’s words. Blessed is Ayodhya, which Rama praised!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हरषे | हर्षित हुए | rejoiced |
| सब | सभी | all |
| कपि | वानर | monkeys |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| प्रभु | प्रभु श्रीराम की | of Lord Rama |
| बानी | वाणी | words |
| धन्य | धन्य | blessed |
| अवध | अयोध्या | Ayodhya |
| जो | जिसकी | which |
| राम | श्रीराम ने | Rama |
| बखानी | महिमा कही | praised |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- उत्तरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 7.4
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 911
- सहायक विषय
- भरत-विरह तथा भरत-हनुमान्-मिलन, अयोध्यामें आनन्द
- मुद्रित पृष्ठ
- 910, 911
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।