सुन्दरकाण्ड · दोहा 53 · दोहा/सोरठा
-की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर।
-की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर।
कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर।।53।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.53 · पुस्तक पृ. 761, 762
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1-की भइ भेंट कि फिरि गए श्रवन सुजसु सुनि मोर।
‘क्या उनसे भेंट हुई, या वे अपने कानों से मेरा सुयश सुनकर लौट गए?’
English explanation
“Did you meet them, or did they turn back upon hearing my glorious reputation?”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| की | क्या | did; whether |
| भइ | हुई | took place |
| भेंट | भेंट; मुलाकात | a meeting |
| कि | या | or |
| फिरि | वापस | back |
| गए | चले गए | went |
| श्रवन | कानों से | with their ears |
| सुजसु | सुयश; अच्छी कीर्ति | glorious reputation |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| मोर | मेरा | my |
2 कहसि न रिपु दल तेज बल बहुत चकित चित तोर।।53।।
‘शत्रु-सेना का तेज और बल बताओ न; तुम्हारा मन बहुत चकित है।’
English explanation
“Do tell me of the enemy army’s might and strength; your mind is greatly astonished.”
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहसि | तुम बताओ | you tell me |
| न | न; आग्रह का शब्द | do; an urging particle |
| रिपु | शत्रु की | of the enemy |
| दल | सेना | army |
| तेज | प्रताप; तेज | might; prowess |
| बल | बल | strength |
| बहुत | बहुत | greatly |
| चकित | चकित; विस्मित | astonished |
| चित | मन | mind |
| तोर | तुम्हारा | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 53
- स्रोत अभिलेख
- 5.53
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 762
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।