सुन्दरकाण्ड · दोहा 52 · दोहा/सोरठा
कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार।
कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार।
सीता देइ मिलेहु न त आवा काल तुम्हार।।52।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.52 · पुस्तक पृ. 761, 761
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1कहेहु मुखागर मूढ़ सन मम संदेसु उदार।
‘उस मूर्ख से मेरे सामने से कहे जाने वाले स्पष्ट, उदार संदेश को कह देना।’
English explanation
‘Tell that fool my generous message directly to his face.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| कहेहु | कह देना | tell; convey |
| मुखागर | सामने, सीधे मुँह पर | directly to his face |
| मूढ़ | मूर्ख रावण | that fool, Ravana |
| सन | से | to |
| मम | मेरा | my |
| संदेसु | संदेश | message |
| उदार | उदार; हितकारी | generous; well-intentioned |
2 सीता देइ मिलेहु न त आवा काल तुम्हार।।52।।
‘सीता को लौटाकर आ मिलो; नहीं तो तुम्हारा काल आ पहुँचा है।’
English explanation
‘Return Sita and come to meet us; otherwise, your death has arrived.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सीता | सीता को | Sita, Rama’s wife |
| देइ | देकर; लौटाकर | having returned |
| मिलेहु | आकर मिलो | come and meet |
| न | नहीं | not |
| त | तो | then; otherwise |
| आवा | आ पहुँचा | has arrived |
| काल | मृत्यु; अंत का समय | death; the hour of doom |
| तुम्हार | तुम्हारा | your |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 52
- स्रोत अभिलेख
- 5.52
- सहायक विषय
- समुद्र पार करनेके लिये विचार, रावणदूत शुकका आना और लक्ष्मणजीके पत्रको लेकर लौटना
- मुद्रित पृष्ठ
- 761, 761
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