सुन्दरकाण्ड · दोहा 47 · दोहा/सोरठा
-अहोभाग्य मम अमित अति राम कृपा सुख पुंज।
-अहोभाग्य मम अमित अति राम कृपा सुख पुंज।
देखेउँ नयन बिरंचि सिब सेब्य जुगल पद कंज।।47।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.47 · पुस्तक पृ. 756, 757
भावार्थ और शब्दार्थ
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1-अहोभाग्य मम अमित अति राम कृपा सुख पुंज।
अहो! मेरा सौभाग्य अत्यंत अपार है; सुख के पुंज राम की कृपा से—
English explanation
Oh, my good fortune is immeasurably great! By the grace of Rama, the embodiment of bliss—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| अहोभाग्य | अहो, अद्भुत सौभाग्य! | Oh, what wonderful good fortune! |
| मम | मेरा | my |
| अमित | असीम | immeasurable |
| अति | अत्यंत | exceedingly |
| राम | श्रीराम की | Rama’s |
| कृपा | कृपा से | through grace |
| सुख | सुख, आनंद | bliss |
| पुंज | राशि, मूर्त समुच्चय | embodiment; abundance |
2 देखेउँ नयन बिरंचि सिब सेब्य जुगल पद कंज।।47।।
मैंने अपनी आँखों से उनके दोनों चरण-कमल देखे, जिनकी सेवा ब्रह्मा और शिव करते हैं।
English explanation
I have seen with my own eyes his two lotus feet, worshipped by Brahma and Shiva.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| देखेउँ | मैंने देखा | I have seen |
| नयन | अपनी आँखों से | with my own eyes |
| बिरंचि | ब्रह्मा, सृष्टिकर्ता | Brahma, the creator |
| सिब | शिव | Shiva |
| सेब्य | सेवा और पूजा के योग्य | worthy of service and worship |
| जुगल | दोनों, जोड़े के | the pair of |
| पद | चरण | feet |
| कंज | कमल | lotuses |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 47
- स्रोत अभिलेख
- 5.47
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 756, 757
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।