सुन्दरकाण्ड · दोहा 46 · दोहा/सोरठा
तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम।
तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम।
जब लगि भजत न राम कहुँ सोक धाम तजि काम।।46।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.46 · पुस्तक पृ. 755, 756
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1तब लगि कुसल न जीव कहुँ सपनेहुँ मन बिश्राम।
तब तक जीव को कुशल नहीं होती, न सपने में भी मन को विश्राम मिलता है—
English explanation
Until then, a living being has no well-being, nor does the mind find rest even in a dream—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| तब | तब | then |
| लगि | तक | until |
| कुसल | कुशल, कल्याण | well-being |
| न | नहीं | not |
| जीव | जीव | a living being |
| कहुँ | को | for |
| सपनेहुँ | सपने में भी | even in a dream |
| मन | मन को | for the mind |
| बिश्राम | विश्राम, शांति | rest, peace |
2 जब लगि भजत न राम कहुँ सोक धाम तजि काम।।46।।
जब तक वह शोक के घर रूपी कामना को छोड़कर राम का भजन नहीं करता।
English explanation
As long as one does not worship Rama after abandoning desire, the abode of sorrow.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जब | जब | as long |
| लगि | तक | as |
| भजत | भजन करता है | worships |
| न | नहीं | not |
| राम | भगवान राम | Lord Rama |
| कहुँ | को | to; marks the object |
| सोक | शोक का | of sorrow |
| धाम | घर, आश्रय | abode |
| तजि | त्यागकर | having abandoned |
| काम | कामना, विषय-लालसा | desire, sensual craving |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 46
- स्रोत अभिलेख
- 5.46
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 756
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।