सुन्दरकाण्ड · दोहा 45 · दोहा/सोरठा
श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर।
श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर।
त्राहि त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर।।45।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.45 · पुस्तक पृ. 755, 755
भावार्थ और शब्दार्थ
1श्रवन सुजसु सुनि आयउँ प्रभु भंजन भव भीर।
हे प्रभु, संसार के भय को दूर करने वाले! आपका सुंदर यश कानों से सुनकर मैं आया हूँ।
English explanation
O Lord, destroyer of the fear of worldly existence, I have come after hearing your glorious reputation.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| श्रवन | कानों से | with my ears |
| सुजसु | आपका सुंदर यश | your glorious reputation |
| सुनि | सुनकर | having heard |
| आयउँ | मैं आया हूँ | I have come |
| प्रभु | हे प्रभु | O Lord |
| भंजन | दूर करने वाले | destroyer |
| भव | संसार का, जन्म-मरण का | of worldly existence and rebirth |
| भीर | भय, भीति | fear, dread |
2 त्राहि त्राहि आरति हरन सरन सुखद रघुबीर।।45।।
हे संकट हरने वाले और शरण में सुख देने वाले रघुवीर! मेरी रक्षा कीजिए, रक्षा कीजिए।
English explanation
O Rama, hero of Raghu’s line, remover of distress and giver of happiness in refuge, protect me, protect me!
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| त्राहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| त्राहि | रक्षा कीजिए | protect me |
| आरति | दुःख, संकट | distress, affliction |
| हरन | हरने वाले | remover |
| सरन | शरण में | in refuge |
| सुखद | सुख देने वाले | giver of happiness |
| रघुबीर | हे रघुवंश के वीर श्रीराम | O Rama, hero of Raghu’s line |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 45
- स्रोत अभिलेख
- 5.45
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 755, 755
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।