सुन्दरकाण्ड · दोहा 44 · दोहा/सोरठा
उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत।
उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत।
जय कृपाल कहि चले अंगद हनू समेत।।44।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.44 · पुस्तक पृ. 754, 754
भावार्थ और शब्दार्थ
AI प्रारूपशब्दार्थ और भावार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। इन्हें अंतिम व्याख्या न मानें।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1उभय भाँति तेहि आनहु हँसि कह कृपानिकेत।
कृपा के धाम राम ने मुसकराकर कहा, ‘दोनों ही स्थितियों में उसे यहाँ ले आओ।’
English explanation
Rama, the abode of compassion, smiled and said, ‘In either case, bring him here.’
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| उभय | दोनों | both |
| भाँति | स्थितियों में | in cases |
| तेहि | उसे | him |
| आनहु | ले आओ | bring here |
| हँसि | मुसकराकर | smiling |
| कह | कहा | said |
| कृपानिकेत | कृपा के धाम राम | Rama, the abode of compassion |
2 जय कृपाल कहि चले अंगद हनू समेत।।44।।
‘हे कृपालु, आपकी जय हो!’ कहकर अंगद हनुमान के साथ चले।
English explanation
Saying, ‘Glory to you, compassionate Lord!’ Angada set out with Hanuman.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जय | जय हो | glory to you |
| कृपाल | हे कृपालु राम | O compassionate Rama |
| कहि | कहकर | having said |
| चले | चल पड़े | set out |
| अंगद | अंगद, बालि के पुत्र | Angada, Bali’s son |
| हनू | हनुमान | Hanuman, Rama’s monkey devotee |
| समेत | के साथ | together with |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 44
- स्रोत अभिलेख
- 5.44
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 754, 754
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।