सुन्दरकाण्ड · दोहा 48 · दोहा/सोरठा
सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम।
सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम।
ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम।।48।।
मूल पाठ · स्रोत अभिलेख 5.48 · पुस्तक पृ. 757, 758
भावार्थ और शब्दार्थ
1 सगुन उपासक परहित निरत नीति दृढ़ नेम।
जो सगुण रूप के उपासक हैं, परहित में लगे रहते हैं और नीति तथा नियम में दृढ़ हैं—
English explanation
Those who worship the divine with attributes, are devoted to others' welfare, and are steadfast in right conduct and observances—
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| सगुन | गुणों और रूप से युक्त ईश्वर के | of the divine with attributes and form |
| उपासक | उपासना करने वाले | worshippers |
| परहित | दूसरों के कल्याण में | in others' welfare |
| निरत | निरंतर लगे हुए | devoted; engaged |
| नीति | सदाचार; उचित आचरण | right conduct |
| दृढ़ | अटल | steadfast |
| नेम | नियम; अनुशासित आचरण | observances; disciplined practice |
2 ते नर प्रान समान मम जिन्ह कें द्विज पद प्रेम।।48।।
और जिन्हें ब्राह्मणों के चरणों से प्रेम है, वे मनुष्य मुझे अपने प्राणों के समान प्रिय हैं।
English explanation
and who love the feet of Brahmins—such people are as dear to me as my own life.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| ते | वे | those |
| नर | मनुष्य | people |
| प्रान | प्राण; जीवन | life |
| समान | के समान प्रिय | as dear as |
| मम | मेरे; मुझे | my; to me |
| जिन्ह | जिनके | whose; who |
| कें | के यहाँ; को | have; for whom |
| द्विज | ब्राह्मणों के | of Brahmins |
| पद | चरणों से | for the feet |
| प्रेम | प्रेम | love |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 48
- स्रोत अभिलेख
- 5.48
- सहायक विषय
- विभीषणका भगवान् श्रीरामजीकी शरणके लिये प्रस्थान और शरणप्राप्ति
- मुद्रित पृष्ठ
- 757, 758
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।