सुन्दरकाण्ड · दोहा 1 · दोहा/सोरठा
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
भावार्थ
पहले अर्थ, फिर शब्दहनुमान्जीने उसे हाथसे छू दिया, फिर प्रणाम करके कहा—भाई! श्रीरामचन्द्रजीका काम किये बिना मुझे विश्राम कहाँ?॥ १॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 715 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
मूल पाठ
हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।।1।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 714, 715
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 हनूमान तेहि परसा कर पुनि कीन्ह प्रनाम।
English explanation
Hanuman touched Mainaka with his hand and then bowed in respect.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| हनूमान | हनुमान ने | Hanuman |
| तेहि | उस मैनाक पर्वत को | that mountain, Mainaka |
| परसा | छुआ | touched |
| कर | हाथ से | with his hand |
| पुनि | फिर | then |
| कीन्ह | किया | made; performed |
| प्रनाम | प्रणाम; आदरपूर्वक नमन | a respectful bow |
2 राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहाँ बिश्राम।।1।।
English explanation
How can I rest before completing Rama’s task?
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| राम | श्रीराम का | Rama’s |
| काजु | कार्य | task |
| कीन्हें | किए; पूरा किए | having done; completed |
| बिनु | बिना | without |
| मोहि | मुझे | for me |
| कहाँ | कहाँ; कैसे संभव | where; how could there be |
| बिश्राम | विश्राम | rest |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- दोहा/सोरठा 1
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 715
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 714, 715
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।