सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी।।
मूल पाठ
जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 714, 715
भावार्थ
मूल पाठ के बादसमुद्रने उन्हें श्रीरघुनाथजीका दूत समझकर मैनाक पर्वतसे कहा कि हे मैनाक! तू इनकी थकावट दूर करनेवाला हो (अर्थात् अपने ऊपर इन्हें विश्राम दे)॥ ५॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 714 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जलनिधि रघुपति दूत बिचारी। तैं मैनाक होहि श्रमहारी।।
English explanation
Recognizing Hanuman as Rama’s messenger, the ocean said: Mainaka, relieve his weariness.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जलनिधि | समुद्र ने | the ocean |
| रघुपति | रघुपति, श्रीराम का | Rama’s |
| दूत | संदेशवाहक | messenger |
| बिचारी | समझकर; विचार करके | recognizing; considering |
| तैं | तुम | you |
| मैनाक | हे मैनाक पर्वत | O Mainaka, the mountain |
| होहि | बनो | become; be |
| श्रमहारी | थकान दूर करने वाले | one who relieves weariness |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 714
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 714, 715
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।