सुन्दरकाण्ड · चौपाई · चौपाई
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
मूल पाठ
जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
जिमि अमोघ रघुपति कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।
स्रोत अभिलेख 5.1 · पुस्तक पृ. 714, 715
भावार्थ
मूल पाठ के बादजिस पर्वतपर हनुमान्जी पैर रखकर चले (जिसपरसे वे उछले), वह तुरंत ही पातालमें धँस गया। जैसे श्रीरघुनाथजीका अमोघ बाण चलता है, उसी तरह हनुमान्जी चले॥ ४॥
स्रोत: सचित्र, सटीक गीता प्रेस संस्करण · PDF पृ. 714 · मूल पाठ अलग स्रोत-अभिलेख से · स्रोत-स्थिति
शब्द-दर-शब्द अर्थ
AI शब्दार्थनीचे के शब्दार्थ AI प्रारूप हैं; विद्वान-समीक्षा बाकी है। ऊपर का भावार्थ PDF संस्करण से है।अर्थ कैसे बने, इसकी प्रक्रिया स्रोत पृष्ठ पर पढ़ें।
1 जेहिं गिरि चरन देइ हनुमंता। चलेउ सो गा पाताल तुरंता।।
English explanation
The mountain from which Hanuman launched himself, planting his feet upon it, immediately sank into the netherworld.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जेहिं | जिस पर | upon which |
| गिरि | पर्वत | mountain |
| चरन | पैर | feet |
| देइ | रखकर | placing |
| हनुमंता | हनुमान | Hanuman |
| चलेउ | चल पड़े; उड़ चले | set off; launched himself |
| सो | वह पर्वत | that mountain |
| गा | चला गया | went; sank |
| पाताल | पाताल में | into the netherworld |
| तुरंता | तुरंत | immediately |
2 जिमि अमोघ रघुपति कर बाना। एही भाँति चलेउ हनुमाना।।
English explanation
Hanuman sped onward like the unfailing arrow from Rama’s hand.
| मूल शब्द | हिन्दी अर्थ | English meaning |
|---|---|---|
| जिमि | जैसे | just as |
| अमोघ | कभी निष्फल न होने वाला | unfailing |
| रघुपति | रघुपति, श्रीराम के | of Rama, lord of Raghu’s lineage |
| कर | हाथ का; हाथ से चला | from the hand |
| बाना | बाण | arrow |
| एही | इसी | this very |
| भाँति | प्रकार | manner |
| चलेउ | चले; वेग से बढ़े | sped onward |
| हनुमाना | हनुमान | Hanuman |
स्रोत और प्रसंग
- काण्ड
- सुन्दरकाण्ड
- पद
- चौपाई
- स्रोत अभिलेख
- 5.1
- भावार्थ पृष्ठ
- PDF पृ. 714
- सहायक विषय
- हनुमान्जीका लङ्काको प्रस्थान, सुरसासे भेंट, छाया पकड़नेवाली राक्षसीका वध
- मुद्रित पृष्ठ
- 714, 715
विषय-शीर्षक पुस्तक की विषय-सूची से हैं; पृष्ठ-मिलान अनुमानित है और एक अंश में कई प्रसंग आ सकते हैं।